बाय अमेरिकन और हायर अमेरिकन पर फिर से चले राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अपने

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Republican presidential candidate Donald Trump speaks to supporters as he takes the stage for a campaign event in Dallas, Monday, Sept. 14, 2015. (AP Photo/LM Otero)

नई दिल्ली: इन दिनो अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अपने बाय अमेरिकन और हायर अमेरिकन रणनीति पर काम करते हुए नजर आ रहे है। इसी रणनीति के तहत  डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों की रक्षा करने वाला एक बडा कार्यकारी आदेश जारी कर दिया। इस कदम से भारतीय इंफोटेक इंड्रस्ट्री पर काफी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि यह आदेश प्रभावी रूप से अमेरिका या वहां स्थित भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी कामगारों को H-1B वीजा के तहत नौकरी दिए जाने पर रोक लगाने का काम करेगा। हालांकि ट्रंप और उनके समर्थकों ने इस संभावना से इनकार किया है। उन्होंने इसका असली मकसद नौकरियों के लिए ज्यादा योग्य विदेश कामगारों को लाना और कंपनियों के प्रवेश स्तर पर अमेरिकी नागरिकों को अहमियत देना बताया है। अमरीकियों की नौकरियों की रक्षा करने के वादे के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप विस्कॉन्सिन राज्य के अपने पहले दौरे में कनोशा की एक फैक्टरी में गए। वहां उन्होंने ‘बाइ अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस आदेश पर उनके हस्ताक्षर के बाद अमेरिका में H-1B वीजा जैसी सुविधा सीमित हो जाएगी और अमेरिकन कंपनियां अपने ही देश की कंपनियों और कामगारों से उत्पाद व सेवाएं लेंगी। हालांकि यह आदेश मेहमान कामगारों पर प्रतिबंध नहीं लगाता, लेकिन इससे प्रति वर्ष 85 हजार H-1B वीजा कामगार प्रभावित होंगे। इनमें आधे से ज्यादा वीजा भारतीयों के होते हैं। हालांकि आदेश में देरी होने की वजह से इस साल दिए जाने वाले वीजा पर असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा यह आदेश H-2B वीजा के तहत अन्य मेहमान कामगारों को प्रभावित नहीं करेगा। H-4 वीजा को लेकर कुछ नहीं कहा गया है। इस (H-4) वीजा के तहत कामगारों के पति या पत्नि को भी निश्चित परिस्थितियों में अमेरिका में काम करने की अनुमति होती है।

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